स्त्री अनुभव और आत्मसाक्षात्कार की दृष्टि से मैत्रेयी पुष्पा व ममता काष्टिया के कथा साष्टहत्य का अध्ययन
Keywords:
स्त्री अनुभि, आत्मसाक्षात्कार, मैत्रेयी पुष्पा, ममता काहलया, कर्था साह त्यAbstract
समकालीन ह िंदी साह त्य में स्त्री लेखन ने अपनी हिहशष्ट प चान स्थाहपत की ै। मैत्रेयी पुष्पा और ममता काहलया दोनोिं ी लेखखकाओिं ने अपने कर्था साह त्य के माध्यम से स्त्री जीिन के िास्तहिक अनुभिोिं को प्रामाहिकता के सार्थ प्रस्तुत हकया ै। प्रस्तुत शोध पत्र में इन दोनोिं रचनाकारोिं के कर्था साह त्य का स्त्री अनुभि और आत्मसाक्षात्कार की दृहष्ट से तुलनात्मक हिश्लेषि हकया गया ै। इस अध्ययन में य स्पष्ट ोता ै हक मैत्रेयी पुष्पा ग्रामीि और हनम्न िगीय खस्त्रयोिं के सिंघषय को रेखािंहकत करती ैं, जबहक ममता काहलया मध्यिगीय श री स्त्री की मानहसक द्विंद्व और आधुहनक जीिन की जहिलताओिं को उजागर करती ैं। दोनोिं ी लेखखकाएिं हपतृसत्तात्मक व्यिस्था के हिरुद्ध स्त्री स्वर को मुखर करती ैं और स्त्री अखिता की खोज को अपने साह त्य का केंद्र बनाती ैं। य शोध कायय गुिात्मक शोध पद्धहत पर आधाररत ै और पाठ हिश्लेषि, तुलनात्मक अध्ययन तर्था नारीिादी आलोचना की सैद्धािंहतकी का उपयोग करता ै।
