आधुनिक भारतीय हिंदी लेखकों के चयनित साहित्य में गरीबी और निम्नवर्गीय परिवारों का चित्रण
Keywords:
गरीबी, निम्नवर्गीय परिवार, हिंदी साहित्य, सामाजिक यथार्थवाद, साहित्यिक चित्रणAbstract
भारतीय हिंदी साहित्य में गरीबी और निम्नवर्गीय परिवारों का चित्रण सामाजिक यथार्थवाद का केंद्रीय तत्व रहा है। प्रेमचंद से लेकर समकालीन लेखकों तक, साहित्यकारों ने दलित, किसान, मजदूर और वंचित वर्गों की पीड़ा को गहन संवेदनशीलता से प्रस्तुत किया है। प्रस्तुत शोध पत्र का उद्देश्य आधुनिक हिंदी साहित्य में गरीबी के साहित्यिक चित्रण और निम्नवर्गीय परिवारों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का विश्लेषण करना है। इस अध्ययन में विवरणात्मक एवं विश्लेषणात्मक शोध पद्धति का प्रयोग किया गया है। प्रेमचंद के रचना संसार, स्वातंत्र्योत्तर हिंदी कहानियों और समकालीन उपन्यासों का साहित्यिक विश्लेषण किया गया है। परिणाम दर्शाते हैं कि हिंदी साहित्य में गरीबी केवल आर्थिक अभाव तक सीमित नहीं है बल्कि यह जमींदारी शोषण, जातिगत भेदभाव, कृषि संकट और मजदूर उत्पीड़न का व्यापक चित्रण प्रस्तुत करती है। समकालीन साहित्य में कृषि संकट और २१वीं सदी के उपन्यासों में मजदूर वर्ग का यथार्थपरक अंकन मिलता है। निष्कर्षतः हिंदी साहित्य निम्नवर्गीय परिवारों की वास्तविकता को प्रामाणिकता से अभिव्यक्त करता है।
