प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सतत विकास की भूमिका: एक अनुसंधानात्मक अध्ययन
Keywords:
सतत विकास, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण, हजारीबाग, वन आवरण, भूजल प्रबंधनAbstract
प्राकृतिक संसाधन मानव जीवन एवं आर्थिक विकास का आधार हैं, परंतु बढ़ती जनसंख्या, खनन, औद्योगीकरण तथा वनोन्मूलन ने इनके अस्तित्व को संकट में डाल दिया है। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य झारखंड के हजारीबाग जिले में प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में सतत विकास की भूमिका का मूल्यांकन करना तथा वर्तमान में अपनाई जा रही संरक्षण रणनीतियों की प्रभावशीलता का विश्लेषण करना है। अनुसंधान वर्णनात्मक एवं विश्लेषणात्मक शोध अभिकल्प पर आधारित है, जिसमें द्वैधीय आँकड़े सरकारी प्रकाशनों, भारत वन स्थिति प्रतिवेदन 2021, केंद्रीय भूजल बोर्ड तथा जनगणना 2011 से लिए गए, तथा 240 उत्तरदाताओं से प्राथमिक आँकड़े संरचित प्रश्नावली के माध्यम से एकत्र किए गए। परिकल्पना यह थी कि सतत विकास अभ्यासों एवं प्राकृतिक संसाधन संरक्षण में सकारात्मक सहसंबंध है। काई-वर्ग परीक्षण तथा सहसंबंध विश्लेषण के परिणामों ने इस परिकल्पना की पुष्टि की (r=0.71, p<0.05)। हजारीबाग में वन आवरण निरंतर घट रहा है तथा भूजल स्तर मॉनसून-पूर्व 2022 में लगभग 2 मीटर तक गिरा। अध्ययन यह निष्कर्ष देता है कि समुदाय-आधारित जल संग्रहण, वनरोपण एवं नीतिगत हस्तक्षेप संरक्षण की कुंजी हैं।
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