स्वयं सहायता समूह और महिलाओं की सामाजिक-राजनीतिक भागीदारी: ग्वालियर जिले का एक अध्ययन
Keywords:
स्वयं सहायता समूह, महिला सशक्तिकरण, ग्वालियर जिला, आर्थिक स्वावलंबन, सामाजिक गतिशीलता, सूक्ष्म वित्त, ग्रामीण विकासAbstract
प्रस्तुत शोध पत्र मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में कार्यरत स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी महिलाओं के आर्थिक, सामाजिक तथा मनोवैज्ञानिक सशक्तिकरण पर पड़ने वाले प्रभावों का अनुभवजन्य विश्लेषण प्रस्तुत करता है। भारत सरकार द्वारा संचालित राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत गठित स्वयं सहायता समूहों ने विगत दो दशकों में महिलाओं को संगठित होकर आर्थिक गतिविधियों में भागीदारी का अवसर प्रदान किया है। इस अध्ययन का उद्देश्य यह परखना है कि क्या स्वयं सहायता समूह की सदस्यता महिलाओं की आय, निर्णय लेने की क्षमता, आत्मविश्वास तथा सामाजिक गतिशीलता में सार्थक परिवर्तन लाती है। इस हेतु ग्वालियर जिले की छह विकासखण्डों से स्तरीकृत यादृच्छिक प्रतिचयन विधि द्वारा 400 स्वयं सहायता समूह सदस्य महिलाओं का चयन कर संरचित प्रश्नावली एवं साक्षात्कार अनुसूची के माध्यम से प्राथमिक आंकड़े एकत्र किए गए। एकत्रित आंकड़ों का विश्लेषण वर्णनात्मक सांख्यिकी, युग्मित टी-परीक्षण, काई-वर्ग परीक्षण तथा सह-संबंध विश्लेषण द्वारा किया गया। परिणाम दर्शाते हैं कि स्वयं सहायता समूह सदस्यता से पूर्व और पश्चात आर्थिक स्थिति में सार्थक अंतर पाया गया (p<0.05)। इस तथा 84 प्रतिशत महिलाओं ने आर्थिक स्वतंत्रता तथा 88 प्रतिशत महिलाओं ने आत्मविश्वास में वृद्धि महसूस की। शिक्षा स्तर तथा सशक्तिकरण सूचकांक के मध्य भी सार्थक सह-संबंध पाया गया। अध्ययन यह निष्कर्ष प्रस्तुत करता है कि स्वयं सहायता समूह ग्वालियर जिले की महिलाओं के बहुआयामी सशक्तिकरण का एक प्रभावी माध्यम सिद्ध हुए हैं, परंतु बाजार संपर्क, कौशल विकास तथा डिजिटल साक्षरता के क्षेत्र में अभी भी पर्याप्त सुधार की आवश्यकता है ताकि सशक्तिकरण की प्रक्रिया को दीर्घकालिक एवं स्थायी बनाया जा सके।
